My Favourite Ghazhal
Monday, 2 April 2007

This is one of my favourite Ghazals sung by Malika-e-Ghazal, Farida Khanum. I searched the Internet, but could not find both the lyrics and the song at one place. But now all Farida Khanum fans can 'sweetlimesoda' it and sing on and on :-)
Due to differences in trasliterations, I would urge the readers to use Internet Explorer , to view the Hindi words, as they were meant to be.
आज जाने की जिद ना करो (३)
यूँही पहलू में बैठे रहो (२)
आज जाने की जिद ना करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की जिद ना करो (२)
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की जिद ना करो
तुम ही सोचो ज़रा, कयूँ ना रोके तुम्हे
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम (२)
तुमको अपनी क़सम जान-ए-जान
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की जिद ना करो
यूँही पहलू में बैठे रहो (२)
आज जाने की जिद ना करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की जिद ना करो
वक़्त कि क़ैद में जिन्दगी है मगर (२)
चन्द घड़ियाँ येही हैं जो आज़ाद हैं (२)
इनको खोकर मेरी जान-ए-जान
उम्र भर ना तरसते रहो
आज जाने कि जिद ना करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की जिद ना करो
कितना मासूम रंगीन है यह समां
हुस्न और इश्क कि आज मैंराज है (२)
कल कि किसको खबर जान-ए-जान
रोक लो आज की रात को
आज जाने की जिद ना करो
यूँही पहलू में बैठे रहो (२)
आज जाने की जिद ना करो
हाय मर जायेंगे, हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया ना करो
आज जाने की जिद ना करो
To sing along click here:
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